मुंशी प्रेमचंद
मुंशी प्रेमचंद! इस नाम को सुनकर ही भारतीय साहित्य के दरबार में हंसी-मजाक शुरू हो जाती है। कुछ कहानियाँ उनकी ऐसी हैं जो बहुत ही गम्भीर थीं, लेकिन आज हम उनकी हंसी-मेंढ़ कहानियों की ओर बढ़ रहे हैं।
बच्चों की पसंद:
मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ न केवल बड़ों को बल्कि छोटों को भी मनोरंजन का बहुत अच्छा स्रोत मिलता था। उनकी कहानी "ईदगाह" में हांफने-फांफने का सबसे खूबसूरत उदाहरण है। वो दिन था, बच्चा हमारे प्रमुख पात्र हमीर। उन्होंने बच्चों के बारे में बताया कि "बच्चों के पास बड़ी ईद है, हमारे पास छोटी ईद है"। इस सरलता में छिपी गहरी बात को समझने का अपना मजा है।
गरीबी के मजाक:
मुंशी प्रेमचंद ने गरीबी के मजाक को भी हास्य के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी कहानी "दो बैलों की कथा" में दो गरीब बच्चे हैं, जिनका एक ही बैल है। लेकिन उन्होंने इस गरीबी को हंसी के साथ दिखाया कि "बच्चों के लिए अच्छा बैल वो होता है जो सीधा है, लेकिन बड़ों के लिए अच्छा वो बैल होता है जो धुंध का सामना करने के बावजूद आपके साथ हो"।
खुशियों का अर्थ:
मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में खुशियों का अर्थ बताने का भी काम किया। "गोदान" कहानी में हमें यह सिखने को मिलता है कि खुशियों का असली अर्थ सेवा करना है।
उनकी हंसी:
मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में हंसी का स्वाद हमेशा बना रहता है। उन्होंने सादगी के साथ हंसी को प्रस्तुत किया।
अफसोस की बात:
लेकिन आजकल के लोग, उनके काम को अधिक गम्भीरता के साथ नहीं देखते। वे उनके कहानियों को केवल हास्य के रूप में देखते हैं। हम नहीं भूल सकते कि मुंशी प्रेमचंद का योगदान हमारे साहित्य के स्थायी भाग रहा है।
आखिर में, हम यह कह सकते हैं कि मुंशी प्रेमचंद ने हंसी के रंग में भी अच्छाई दिखाई और हमें यह सिखाया कि जीवन को हंसते-हंसाते बिताने का आनंद देना कितना महत्वपूर्ण है।


