कहानियों का जादू हमारे जीवन में हमेशा एक खास स्थान रखता है। हम बचपन से ही कहानियों के संसार में खो जाते हैं, और ये कहानियाँ हमारी माँ-बाप के मुह से निकलकर हमें सुनाने के लिए तैयार होती हैं। जब बड़े हो जाते हैं, तो हम खुद भी कहानियों को पढ़ने लगते हैं, और फिर भी उनमें वो मिठास और सिखने का सौभाग्य पाते हैं, जो किसी और जगह से पाना मुश्किल है।
विश्वास करो या ना करो, अलियन भी डरते हैं: एक समय की बात है, गांव के एक छोटे से लड़के का नाम राजू था। राजू को एक रोज रात को अपने कमरे में अलियनों के आगमन के बारे में एक सपना आया। वह अपने दोस्तों को यह सपना बताने लगा, और उन्होंने तय किया कि वे अलियनों के साथ दोस्ती करेंगे। जब वे एक रात खेत में सो रहे थे, तो अलियन आ गए और उनके साथ बैलगाड़ी खेलने लगे। राजू के दोस्त हैरान रह गए, और राजू ने कहा, "विश्वास करो या ना करो, अलियन भी डरते हैं, पर उनकी बैलगाड़ी में जीत नहीं है!" यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें कभी किसी को उनके रूप या स्वरूप के आधार पर नहीं जाना चाहिए।
जीत की खातिर कुछ भी कर सकते हैं: एक गांव में एक छोटा सा मुर्गा अपनी बड़ी बीमारी के बावजूद एक बड़े मुर्गे के साथ चेस खेलने के लिए तैयार हो गया। सभी मुर्गे और मुर्गियाँ हंस हंसकर उस पर हँसी उड़ाने लगे। परंतु, वह छोटा मुर्गा बड़े मुर्गे को चेस में हराने में सफल रहा और जीत हासिल की। इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमारी आत्मविश्वास और मेहनत हमें किसी भी मुश्किल को पार करने में मदद कर सकते हैं।
खुशियों के साथ बड़े होना: एक बड़े शहर में एक छोटी सी छुट्टी के बाद वापस लौटने पर बच्चे ने अपने दोस्तों को दिल्ली की देखने की कहानी सुनाई। उसने कहा, "दिल्ली गई तो खुशी क्योंकि मुझे वहां देखने का और कुछ आजमाना
चाहिए!" यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि हमें हमारे छोटे और आस-पास के पलों का आनंद उठाना चाहिए, और हमें हमारे दिल की सुनने की आदत रखनी चाहिए।


